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मकर संक्रांति 2027 कब है? तारीख और 58 मकर संक्रांति की शुभकामनाएं हिंदी में

मकर संक्रांति 2027 (शुक्रवार, 15 जनवरी) की तारीख, राज्यों में इसके नाम और परिवार, दोस्त, ऑफिस-टीचर के लिए 58 ओरिजिनल शुभकामनाएं — पतंग और तिल-गुड़ वाले मैसेज भी।

अपडेट: 9 मिनट में पढ़ें 58 संदेश लेखक:

इस साल मकर संक्रांति शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 को मनाई जाएगी। सूर्य 14 जनवरी की रात मकर राशि में प्रवेश करेंगे, इसलिए त्योहार अगले दिन माना गया है। नीचे संक्रांति का छोटा-सा परिचय, राज्यों में इसके नाम और 58 ओरिजिनल शुभकामनाएं हैं।

मकर संक्रांति 2027 की तारीख

त्योहारमकर संक्रांति 2027
दिनशुक्रवार
तारीख15 जनवरी 2027
संक्रांति का क्षण14 जनवरी 2027, रात 9:14 बजे (नई दिल्ली)
पुण्य काल15 जनवरी, सुबह 7:15 से शाम 5:46 तक (नई दिल्ली)

समय दृक पंचांग (नई दिल्ली) के अनुसार है। पुण्य काल का समय अपने शहर के पंचांग से देखें — कई जगह संक्रांति 14 जनवरी को भी मनाई जाती है, इसलिए तारीख एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है

  • इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में जाते हैं, इसी को मकर संक्रांति कहते हैं। यह त्योहार सूर्य की चाल से तय होता है, इसलिए इसकी तारीख लगभग हर साल 14 या 15 जनवरी ही रहती है।
  • परंपरा में इसी दिन से सूर्य का उत्तरायण शुरू माना जाता है। कड़ाके की सर्दी धीरे-धीरे कम होने लगती है और दिन बड़े होने लगते हैं।
  • सर्दी के इस मौसम में घर-घर तिल और गुड़ के लड्डू, चिक्की और गजक बनते हैं, जो अपनों और पड़ोसियों में बांटे जाते हैं।
  • उत्तर प्रदेश और बिहार में इस दिन खिचड़ी बनाने और बांटने का रिवाज़ है, इसलिए वहां इसे “खिचड़ी” भी कहते हैं; बिहार में दही-चूड़ा भी खूब खाया जाता है।
  • गुजरात और राजस्थान में पूरा दिन छतों पर पतंगबाज़ी होती है। बहुत से लोग सुबह स्नान करके सूर्य को जल चढ़ाते हैं और ज़रूरतमंदों को तिल, गुड़ और खिचड़ी बांटते हैं।

अलग-अलग राज्यों में मकर संक्रांति के नाम

राज्यत्योहार का नामखास बात
तमिलनाडुपोंगलनए चावल, दूध और गुड़ से पोंगल पकाया जाता है; चार दिन का त्योहार
गुजरातउत्तरायणसुबह से शाम तक छतों पर पतंगबाज़ी
असममाघ बिहू (भोगाली बिहू)फसल की दावत और मेजी (अलाव)
उत्तर प्रदेश, बिहारखिचड़ीखिचड़ी बनाना-बांटना, दही-चूड़ा
पंजाबमाघीएक रात पहले लोहड़ी मनाई जाती है
महाराष्ट्रमकर संक्रांतितिलगुल बांटकर मीठा बोलने की परंपरा
पश्चिम बंगालपौष संक्रांतिचावल और गुड़ से बने पीठे
कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगानासंक्रांतिरंगोली और नई फसल के पकवान

परिवार के लिए मकर संक्रांति की शुभकामनाएं

सूरज की नई किरणें आपके घर में नई खुशियां लेकर आएं और तिल-गुड़ की तरह रिश्तों में मिठास बनी रहे। मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं!

मम्मी, आपके हाथ के तिल के लड्डुओं के बिना संक्रांति अधूरी है। इस साल भी वही स्वाद और आपका ढेर सारा प्यार चाहिए। मकर संक्रांति मुबारक!

[नाम] जी, जैसे सूरज उत्तर की ओर बढ़ता है, वैसे ही आपका परिवार हर दिन तरक्की की ओर बढ़े। संक्रांति की बधाई!

खिचड़ी की खुशबू, छत पर पतंग और सबका साथ — यही है हमारे घर की संक्रांति। आपको और पूरे परिवार को शुभकामनाएं!

पापा, बचपन में आपने ही पतंग उड़ाना सिखाया था। आज भी हर ऊंची पतंग में आपकी सीख दिखती है। आपको मकर संक्रांति की बधाई!

नई फसल की तरह आपके जीवन में भी नई उम्मीदें लहलहाएं। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर आपको और आपके परिवार को शुभकामनाएं।

दादी जी, आपकी बनाई गुड़ की पट्टी और आपकी कहानियां — दोनों हमारी संक्रांति की सबसे मीठी याद हैं। आपको प्रणाम और संक्रांति की बधाई!

सर्दी की धूप जैसी गर्माहट आपके घर में हमेशा बनी रहे। मकर संक्रांति की ढेरों शुभकामनाएं!

दूर होकर भी इस बार खिचड़ी का पहला कौर आपको याद करके ही खाएंगे। आप सबको मकर संक्रांति की बधाई!

भैया-भाभी, आपके घर का आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से और आंगन खुशियों से भरा रहे। हैप्पी मकर संक्रांति!

दोस्तों के लिए संक्रांति के मैसेज

[नाम], इस संक्रांति पर हमारी दोस्ती की डोर और मज़बूत हो जाए — कोई भी पेच इसे काट न सके! हैप्पी मकर संक्रांति, दोस्त!

तिल-गुड़ खा और मीठा-मीठा बोल, वरना छत पर सबसे पहले तेरी ही पतंग कटेगी! मकर संक्रांति मुबारक, यार!

तुम्हारे बिना छत की पतंगबाज़ी अधूरी लगती है। इस बार जल्दी आ जाना, चरखी तुम्हें ही पकड़नी है। संक्रांति की शुभकामनाएं!

दोस्ती भी पतंग जैसी है — भरोसे की डोर हो तो आसमान छू लेती है। तुझे मकर संक्रांति की ढेर सारी बधाई!

इस साल तेरे सपनों की पतंग इतनी ऊंची उड़े कि सब देखते रह जाएं। हैप्पी उत्तरायण, भाई!

चल, पुरानी कड़वाहट भूलकर तिल-गुड़ जैसी मीठी शुरुआत करते हैं। मकर संक्रांति मुबारक, मेरे दोस्त!

खिचड़ी मेरी तरफ़ से, दही-चूड़ा तेरी तरफ़ से — डील पक्की? हैप्पी मकर संक्रांति!

तुम्हारी ज़िंदगी में खुशियां पतंगों की तरह रंग-बिरंगी हों। [नाम], संक्रांति की शुभकामनाएं!

कॉलेज की छत, सस्ती पतंगें और ढेर सारी हंसी — वो संक्रांति आज भी याद है। तुझे बहुत-बहुत बधाई, यार!

पतंग वाले मज़ेदार संक्रांति मैसेज

आज छत पर सिर्फ़ दो तरह के लोग होंगे — एक जो पतंग काटते हैं, और दूसरे जो कहते हैं, “हवा ही ठीक नहीं थी।” हैप्पी मकर संक्रांति!

साल भर जो पड़ोसी नमस्ते तक नहीं करता, आज उसी से पेच लड़ेगा। मकर संक्रांति की शुभकामनाएं!

मेरी पतंग कटे तो समझना हवा का कसूर है, और तुम्हारी कटे तो तुम्हारा! हैप्पी उत्तरायण!

आज खाना छत पर, चाय छत पर और बहस भी छत पर — क्योंकि आज संक्रांति है! आप सबको बधाई!

नीचे से मम्मी की आवाज़ आती रहेगी, “खाना ठंडा हो रहा है”, और ऊपर से जवाब जाएगा, “बस एक पेच और!” हैप्पी मकर संक्रांति!

हाथ में चरखी, आंखें आसमान पर और चेहरे पर जीत की मुस्कान — यही है असली संक्रांति। सबको शुभकामनाएं!

“वो काटा!” — साल में एक यही दिन है, जब पूरा मोहल्ला एक साथ चिल्लाता है। मकर संक्रांति मुबारक!

चरखी पकड़ने वाला दोस्त ही असली हीरो है, पतंग उड़ाने वाला तो बस नाम कमाता है। हैप्पी संक्रांति, मेरे हीरो!

आज मेरी पतंग इतनी ऊंची जाएगी कि बादल भी पूछेंगे, “भाई, परमिशन ली थी?” हैप्पी उत्तरायण!

पतंग कटे या बचे, तिल-गुड़ का लड्डू तो पक्का मिलेगा! मकर संक्रांति की मीठी बधाई!

तिल-गुड़ वाली मीठी शुभकामनाएं

तिल-गुड़ की तरह हम भी जुड़े रहें और बातों में हमेशा मिठास रहे। मकर संक्रांति की शुभकामनाएं!

एक-एक तिल छोटा होता है, पर गुड़ के साथ मिलकर लड्डू बन जाता है। ऐसे ही हमारा साथ बना रहे। हैप्पी मकर संक्रांति!

[नाम], इस संक्रांति पर कड़वी बातें भूलकर सिर्फ़ मीठा बोलिए — तिल-गुड़ लीजिए और मुस्कुराइए!

गुड़ की मिठास, तिल की खुशबू और अपनों का प्यार — आपका साल इन्हीं से भरा रहे। मकर संक्रांति मुबारक!

रिश्तों में कभी कड़वाहट आ जाए, तो एक तिल-गुड़ का लड्डू ही काफ़ी है। संक्रांति की मीठी शुभकामनाएं!

आपकी ज़िंदगी गजक जैसी हो — थोड़ी करारी और बहुत सारी मीठी। हैप्पी मकर संक्रांति!

तिल-गुड़ का यह मीठा संदेश आपके नाम — पूरा साल मुस्कान से भरा रहे। मकर संक्रांति की बधाई!

चिक्की, लड्डू और रेवड़ी — संक्रांति की थाली जितनी मीठी है, आपका साल उससे भी ज़्यादा मीठा हो।

मीठा खाइए, मीठा बोलिए और सबको साथ लेकर चलिए। मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं!

ऑफिस और टीचर के लिए संक्रांति की शुभकामनाएं

आपको और आपके परिवार को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं। यह साल हमारी पूरी टीम के लिए नई ऊंचाइयां लेकर आए।

सर, आपके मार्गदर्शन में हमारी टीम की पतंग हमेशा ऊंची उड़ी है। आपको मकर संक्रांति की शुभकामनाएं!

[नाम] जी, संक्रांति का यह पर्व आपके काम और जीवन में नई ऊर्जा और सफलता लेकर आए। हार्दिक शुभकामनाएं।

प्रिय साथियों, तिल-गुड़ की तरह हमारी टीम भी जुड़ी रहे और साथ मिलकर आगे बढ़े। मकर संक्रांति मुबारक!

आदरणीय गुरुजी, जैसे सूरज अंधेरा दूर करता है, वैसे ही आपने हमारे मन से डर और उलझन दूर की। आपको मकर संक्रांति की सादर शुभकामनाएं।

मैडम, आपकी सिखाई हर बात हमारी डोर है, जिसके सहारे हम ऊंचा उड़ना सीख रहे हैं। हैप्पी मकर संक्रांति!

हमारे सभी ग्राहकों और साथियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं। आपका भरोसा ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है।

सर, नई फसल की तरह इस साल आपकी हर मेहनत का अच्छा फल मिले। मकर संक्रांति की हार्दिक बधाई।

छोटे संक्रांति स्टेटस (WhatsApp / Instagram)

पतंग ऊंची, इरादे उससे भी ऊंचे। हैप्पी मकर संक्रांति!

तिल-गुड़ का स्वाद, अपनों का साथ। संक्रांति मुबारक!

आज आसमान भी रंगीन है। हैप्पी उत्तरायण!

खिचड़ी, धूप और परिवार — परफ़ेक्ट संक्रांति।

डोर मज़बूत, पेच पक्का। हैप्पी संक्रांति!

सूरज नई राह पर है, चलो हम भी चलें। मकर संक्रांति मुबारक!

छत, चरखी और दोस्त — आज बस यही प्लान है।

आज मीठा बोलने का दिन है, कोई ताना नहीं!

“वो काटा!” — साल का सबसे प्यारा शोर।

ठंडी हवा, गुनगुनी धूप, ऊंची पतंग। हैप्पी मकर संक्रांति!

कड़वाहट कम, मिठास ज़्यादा — यही संक्रांति का संदेश।

दही-चूड़ा तैयार है, आप कब आ रहे हैं? संक्रांति की बधाई!

इन शुभकामनाओं को भेजने के टिप्स

  • ऊपर के नाम वाले बॉक्स में नाम लिखें — जिन मैसेज में [नाम] है, उनमें नाम अपने-आप भर जाएगा।
  • 15 जनवरी की सुबह मैसेज भेजें; जिन घरों में संक्रांति 14 जनवरी को मनती है, उन्हें एक दिन पहले भेज दें।
  • गुजरात के दोस्तों को “उत्तरायण”, तमिल दोस्तों को “पोंगल” और असम के दोस्तों को “माघ बिहू” की बधाई देंगे तो उन्हें ज़्यादा अपनापन लगेगा।
  • बड़ों और ऑफिस के लिए “आप” वाले मैसेज चुनें, दोस्तों के लिए पतंग वाले मज़ेदार मैसेज।
  • पतंग उड़ाते समय पक्षियों और राहगीरों को चोट पहुंचाने वाले मांझे से बचें और बच्चों को छत की मुंडेर से दूर रखें।

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