🇮🇳 राष्ट्रीय पर्व पर भाषण

26 जनवरी पर भाषण 2027: कक्षा 6, 7, 8 के लिए 2 और 3 मिनट का भाषण + 17 देशभक्ति शायरी

78वें गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2027) के लिए कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के 2 मिनट और 3 मिनट के भाषण — संविधान, अधिकार-कर्तव्य और एकता पर — साथ में मंच के लिए 17 ओरिजिनल शायरी।

अपडेट: 7 मिनट में पढ़ें 19 भाषण और हिस्से लेखक:

कक्षा: 6–8बोलने का समय: 3 मिनट 15 सेकंड

इस साल गणतंत्र दिवस मंगलवार, 26 जनवरी 2027 को मनाया जाएगा — यह 78वां गणतंत्र दिवस है। कक्षा 6, 7 और 8 के विद्यार्थियों के लिए यहाँ दो भाषण हैं: 2 मिनट का भाषण अधिकार और कर्तव्य पर, और 3 मिनट का भाषण संविधान की कहानी और देश की एकता पर। साथ में भाषण के बीच या आखिर में बोलने के लिए 17 ओरिजिनल दो-लाइन शायरी भी हैं।

2 मिनट का भाषण: अधिकार भी, कर्तव्य भी (कक्षा 6–7)

आदरणीय मुख्य अतिथि, प्रधानाचार्य जी, सम्मानित शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियों, आप सभी को 78वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई।

एक पल के लिए सोचिए — अगर क्रिकेट के मैच में कोई नियम ही न हो, तो क्या होगा? हर खिलाड़ी अपनी मर्ज़ी चलाएगा और खेल बिगड़ जाएगा। देश भी एक बहुत बड़ा मैदान है, और उसके नियमों की किताब है हमारा संविधान। यह संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ और उसी दिन भारत एक गणतंत्र बना।

संविधान हमें कई अधिकार देता है। कानून की नज़र में हम सब बराबर हैं। हमें अपनी बात कहने की आज़ादी है, अपने धर्म को मानने की आज़ादी है और पढ़ने-लिखने का हक़ है। लेकिन संविधान सिर्फ़ अधिकार नहीं देता, वह हमें कर्तव्य भी याद दिलाता है — संविधान, तिरंगे और राष्ट्रगान का सम्मान करना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना, पर्यावरण को बचाना और आपस में भाईचारा बनाए रखना।

साथियों, अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अगर हम सिर्फ़ अपने हक़ की बात करें और अपना फ़र्ज़ भूल जाएँ, तो गणतंत्र कमज़ोर हो जाता है। स्कूल की बेंच पर कुछ न लिखना, खुली टोंटी बंद करना, लाइन में अपनी बारी का इंतज़ार करना — ये छोटे-छोटे काम ही असली देशभक्ति हैं।

आइए, आज तिरंगे के सामने हम यह संकल्प लें कि हम अपने अधिकार भी जानेंगे और अपने कर्तव्य भी पूरी ईमानदारी से निभाएँगे।

धन्यवाद! जय हिंद! जय भारत!

3 मिनट का भाषण: संविधान की कहानी और हमारी एकता (कक्षा 7–8)

माननीय मुख्य अतिथि, आदरणीय प्रधानाचार्य जी, सम्मानित शिक्षकगण, अभिभावकगण और मेरे प्यारे साथियों, आप सभी को 78वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

साथियों, 26 जनवरी की तारीख तो हम सबको याद है, पर 26 नवंबर 1949 की तारीख शायद कम लोगों को याद रहती है। उसी दिन संविधान सभा ने हमारे संविधान को अपनाया था। इसे बनाने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से आए सदस्यों ने लंबी बहसें कीं और हर शब्द पर गहराई से सोचा। इसकी प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे। फिर 26 जनवरी 1950 को यह संविधान लागू हुआ, क्योंकि 1930 में इसी दिन पूर्ण स्वराज का संकल्प लिया गया था। उसी दिन डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति बने और भारत एक गणतंत्र बन गया।

हमारे संविधान की प्रस्तावना “हम, भारत के लोग” शब्दों से शुरू होती है। ये शब्द बताते हैं कि इस देश की असली ताक़त जनता के हाथ में है। प्रस्तावना हर नागरिक को न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता का भरोसा देती है।

हमारा संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान माना जाता है, और इसकी एक वजह यह भी है कि इतने बड़े और इतने रंग-बिरंगे देश को एक धागे में पिरोना आसान नहीं था। हमारे यहाँ अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं, अनेक धर्मों के लोग रहते हैं, और खान-पान व पहनावा कुछ ही दूरी पर बदल जाता है। फिर भी जब कर्तव्य पथ पर अलग-अलग राज्यों की झाँकियाँ एक के बाद एक निकलती हैं, तो लगता है जैसे पूरा भारत एक ही परिवार है। यही अनेकता में एकता हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।

लेकिन साथियों, संविधान अलमारी में रखा रहे तो वह सिर्फ़ कागज़ है। वह ज़िंदा तब होता है, जब हम उसे अपने व्यवहार में उतारते हैं। जब हम किसी की जाति, धर्म या भाषा देखकर उससे दूरी नहीं बनाते, जब हम लड़के और लड़की को बराबर मौका देते हैं, जब हम कोई मैसेज आगे भेजने से पहले उसकी सच्चाई जाँचते हैं, और जब हम सार्वजनिक चीज़ों को अपना समझकर सँभालते हैं — तभी हम सच्चे नागरिक बनते हैं।

आने वाला भारत हम विद्यार्थियों के हाथ में है। आइए, आज संकल्प लें कि हम अपने अधिकारों को जानेंगे, अपने कर्तव्यों को निभाएँगे और देश की एकता को कभी कमज़ोर नहीं होने देंगे।

इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता/देती हूँ। धन्यवाद! जय हिंद! जय भारत!

शायरी: तिरंगा और वतन

तिरंगे की छाँव में पलते हैं सपने सारे,
इसी मिट्टी में बसते हैं प्राण हमारे।

छब्बीस जनवरी आई, लेकर नई उमंग,
आसमान में लहराया तिरंगा तीनों रंग।

सरहद पर जो जागते हैं, उनको मेरा सलाम,
उनकी बदौलत ही चैन से है ये सुबह-ओ-शाम।

शहीदों के लहू से सींची है ये ज़मीन,
इसकी शान बचाएंगे हम, ये है हमारा यक़ीन।

हिमालय की चोटी से लेकर सागर की लहर तक,
एक ही नाम गूँजता है — भारत, हर गाँव, हर शहर तक।

मेरी पहचान तिरंगा है, मेरा गर्व संविधान,
मैं इसका छोटा-सा सिपाही, इसका हर कण मेरी जान।

शायरी: संविधान और बराबरी

ये सिर्फ़ किताब नहीं, हर दिल की आवाज़ है,
संविधान ही इस देश का असली ताज है।

ना राजा, ना रानी यहाँ, जनता चुनती सरकार,
यही बताने आता है गणतंत्र का त्योहार।

बाबा साहब की कलम ने ऐसी राह बनाई,
हर इंसान को बराबरी की पहचान दिलाई।

बेटा हो या बेटी, सबको मिले एक-सा मान,
यही तो कहता आया है हमारा संविधान।

हमें मिला है संविधान से बोलने का अधिकार,
पर याद रहे, सच और इज़्ज़त से हो हर विचार।

आज़ादी मिली थी लड़कर, गणतंत्र मिला सोचकर,
अब दोनों को सँभालना है हम सबको मिलकर।

शायरी: एकता और फ़र्ज़

बोली अलग, पहनावा अलग, अलग-अलग है थाली,
फिर भी जब तिरंगा लहराए, बजती एक ही ताली।

मज़हब अलग, ज़ुबान अलग, पर दिल की धड़कन एक,
भारत माँ के आँगन में हम सारे बच्चे नेक।

हक़ की बात से पहले फ़र्ज़ निभाना सीखें,
गणतंत्र को सच्चा करना है तो खुद को बदलना सीखें।

कर्तव्य पथ पर जब कदम से कदम मिलते हैं,
लगता है पूरे देश के दिल एक साथ चलते हैं।

पढ़-लिखकर जब आगे बढ़ेगा हर एक बच्चा,
तभी बनेगा गणतंत्र हमारा सबसे सच्चा।

मंच पर भाषण देने के टिप्स

  • भाषण रटने की जगह उसके हिस्से याद करें: 2 मिनट वाले में “खेल का नियम → अधिकार → कर्तव्य → संकल्प”, 3 मिनट वाले में “1949 की तारीख → प्रस्तावना → एकता → हमारा व्यवहार”।
  • मंच पर सीधे खड़े हों, दोनों पैरों पर बराबर वज़न रखें और हाथ ढीले छोड़ें। बीच-बीच में अलग-अलग तरफ़ बैठे लोगों की ओर देखें।
  • धीरे बोलें — 2 मिनट वाला भाषण करीब 230 शब्द का है और 3 मिनट वाला करीब 380 शब्द का। तारीखों के बाद आधा पल रुकें।
  • “अगर क्रिकेट के मैच में कोई नियम ही न हो” और “हम, भारत के लोग” वाली लाइनें ज़ोर देकर बोलें, ये भाषण की जान हैं।
  • शायरी भाषण की शुरुआत में या “जय हिंद” से ठीक पहले बोलें। दूसरी लाइन से पहले थोड़ा रुकें, ताकि तालियाँ आ सकें।
  • लड़कियाँ “देता” की जगह “देती” बोलें।

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