26 जनवरी पर शिक्षक और प्रधानाचार्य का भाषण 2027: 3 और 5 मिनट + एंकरिंग और धन्यवाद ज्ञापन
78वें गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2027) के लिए शिक्षक का 3 मिनट और प्रधानाचार्य का 5 मिनट का भाषण, एंकरिंग की शुरुआत, बीच और समापन की लाइनें तथा धन्यवाद ज्ञापन — प्रिंट या PDF सेव करें।
अपडेट: 10 मिनट में पढ़ें 11 भाषण और हिस्से लेखक: शब्द दीप
कक्षा: शिक्षकबोलने का समय: 5 मिनट
गणतंत्र दिवस मंगलवार, 26 जनवरी 2027 को है — यह 78वां गणतंत्र दिवस है। यहाँ शिक्षकों के लिए 3 मिनट का भाषण, प्रधानाचार्य के लिए 5 मिनट का भाषण, कार्यक्रम संचालन (एंकरिंग) की शुरुआत, बीच और समापन की लाइनें, और आखिर में धन्यवाद ज्ञापन दिया गया है। कोष्ठक ( ) वाली जगह पर अपने स्कूल के हिसाब से नाम या कक्षा भरें।
शिक्षक के लिए 3 मिनट का भाषण
आदरणीय प्रधानाचार्य जी, मेरे सहयोगी शिक्षक-शिक्षिकाएँ, सम्मानित अभिभावकगण और मेरे प्यारे विद्यार्थियों, आप सभी को 78वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
हर साल जब इस मैदान में तिरंगा ऊपर जाता है और “जन गण मन” की धुन शुरू होती है, तो मैं आप सबके चेहरों पर एक अलग-सी चमक देखता/देखती हूँ। वह चमक बताती है कि देश-प्रेम किसी किताब से नहीं, दिल से आता है। आज मैं उसी चमक को एक दिशा देने के लिए कुछ बातें कहना चाहता/चाहती हूँ।
15 अगस्त 1947 को हमें आज़ादी मिली, लेकिन आज़ाद देश को चलाने के लिए एक मज़बूत नींव चाहिए थी। वह नींव है हमारा संविधान, जिसे संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को अपनाया और जो 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। इसकी प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे। संविधान सभा के सदस्यों ने मिलकर ऐसा संविधान बनाया, जिसमें हर नागरिक को बराबरी का दर्जा मिला।
गणतंत्र का अर्थ है ऐसा देश, जहाँ सत्ता किसी राजा के हाथ में नहीं, बल्कि जनता और उसके चुने हुए प्रतिनिधियों के हाथ में होती है। पर यह व्यवस्था तभी अच्छी चलती है, जब नागरिक पढ़े-लिखे, ईमानदार और ज़िम्मेदार हों। इसलिए मैं मानता/मानती हूँ कि हर कक्षा एक छोटा गणतंत्र है। जब आप कक्षा का मॉनिटर चुनते हैं, तो आप लोकतंत्र सीखते हैं। जब आप अपनी बारी का इंतज़ार करते हैं, तो आप नियम का सम्मान करते हैं। और जब आप किसी कमज़ोर साथी की मदद करते हैं, तो आप भाईचारे का पाठ पढ़ते हैं।
एक शिक्षक होने के नाते आपसे मेरी तीन छोटी-सी गुज़ारिश है। पहली, सवाल पूछने से कभी न डरें, क्योंकि सोचने वाले नागरिक ही देश को आगे ले जाते हैं। दूसरी, हमेशा सच का साथ दें, चाहे बात कितनी ही छोटी क्यों न हो। और तीसरी, अपने आस-पास की चीज़ों को अपना समझें — स्कूल की दीवारें, सड़क के पेड़, पार्क की बेंच, सब हमारी साझी संपत्ति हैं।
आज तिरंगे को सलामी देते हुए हम सब — शिक्षक भी और विद्यार्थी भी — यह वादा करें कि हम अपने संविधान की भावना को सिर्फ़ याद नहीं रखेंगे, उसे जीकर दिखाएँगे।
धन्यवाद! जय हिंद! जय भारत!
प्रधानाचार्य के लिए 5 मिनट का भाषण
माननीय मुख्य अतिथि महोदय/महोदया, विद्यालय प्रबंधन समिति के सम्मानित सदस्यगण, आदरणीय अभिभावकगण, मेरे सहयोगी शिक्षक-शिक्षिकाएँ, सभी कर्मचारीगण और मेरे प्यारे विद्यार्थियों, आप सभी को 78वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।
आज की यह सुबह खास है। अभी-अभी हमने मिलकर तिरंगा फहराया, राष्ट्रगान गाया और बच्चों की कदमताल देखी। हवा में लहराता तिरंगा हमें याद दिलाता है कि हम एक ऐसे देश के नागरिक हैं, जिसने अपना भविष्य खुद लिखने का फैसला किया। मैं मुख्य अतिथि जी का विशेष आभार प्रकट करता/करती हूँ कि उन्होंने अपना कीमती समय निकालकर हमारे बीच आने की कृपा की।
आज़ादी की लड़ाई के दौरान 26 जनवरी 1930 को देश ने पूर्ण स्वराज का संकल्प लिया था। इसके बाद 15 अगस्त 1947 को देश आज़ाद हुआ। आज़ादी के बाद सबसे बड़ा सवाल यह था कि इतना विशाल और विविधता से भरा देश किन नियमों से चलेगा। इसका उत्तर संविधान सभा ने दिया। लंबी चर्चाओं के बाद 26 नवंबर 1949 को संविधान अपनाया गया, जिसकी प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे। पूर्ण स्वराज के उसी संकल्प की याद में इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया और डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति बने। तब से हर साल नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति तिरंगा फहराते हैं और परेड में देश की शक्ति और संस्कृति की झलक दिखाई देती है।
हमारा संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान माना जाता है। पर इसकी महानता इसकी लंबाई में नहीं, इसकी सोच में है। इसकी प्रस्तावना “हम, भारत के लोग” से शुरू होती है — यानी इस देश का मालिक कोई एक व्यक्ति नहीं, हम सब हैं। संविधान हर नागरिक को बराबरी, आज़ादी और सम्मान से जीने का भरोसा देता है, और हमें हमारे मूल कर्तव्य भी याद दिलाता है। ज़रूरत पड़ने पर इसमें संशोधन भी किया जा सकता है, इसलिए यह समय के साथ चलने वाला एक जीवित दस्तावेज़ है।
प्यारे विद्यार्थियों, विद्यालय सिर्फ़ परीक्षा पास कराने की जगह नहीं है। यह वह जगह है, जहाँ अच्छे नागरिक तैयार होते हैं। मैं चाहता/चाहती हूँ कि इस वर्ष हम सब मिलकर तीन बातों पर ध्यान दें। पहली, स्वच्छता — हमारी कक्षाएँ, गलियारे और मैदान साफ रहें, और यह काम हम खुद करें। दूसरी, पढ़ने की आदत — पाठ्यपुस्तक के अलावा पुस्तकालय की किताबें भी पढ़ें, क्योंकि अच्छी किताबें सोच को बड़ा बनाती हैं। तीसरी, बराबरी और सम्मान — कोई भी बच्चा अपनी बोली, अपने घर या अपने अंकों की वजह से खुद को अकेला या छोटा महसूस न करे।
आज का समय मोबाइल और इंटरनेट का है। संविधान ने हमें बोलने और लिखने की आज़ादी दी है, पर इस आज़ादी के साथ ज़िम्मेदारी भी आती है। कोई भी खबर या मैसेज आगे भेजने से पहले सोचिए कि क्या वह सच है और कहीं उससे किसी को ठेस तो नहीं पहुँचेगी। सोच-समझकर किया गया ऑनलाइन व्यवहार भी आज की देशभक्ति का हिस्सा है।
आदरणीय अभिभावकगण, बच्चे जो देखते हैं, वही सीखते हैं। जब वे आपको ट्रैफिक के नियम मानते, लाइन में अपनी बारी का इंतज़ार करते और हर व्यक्ति से इज़्ज़त से बात करते देखते हैं, तो संविधान की सीख उनके मन में अपने-आप उतर जाती है। आइए, घर और स्कूल मिलकर बच्चों को अच्छा इंसान और जागरूक नागरिक बनाएँ।
अंत में मैं उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों, संविधान निर्माताओं और देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर जवानों को नमन करता/करती हूँ, जिनकी वजह से हम आज यह दिन गर्व से मना पा रहे हैं। आइए, आज यह संकल्प लें कि हम अपने देश की एकता, अखंडता और भाईचारे को हमेशा बनाए रखेंगे।
इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता/करती हूँ। धन्यवाद! जय हिंद! जय भारत!
एंकरिंग: कार्यक्रम की शुरुआत
सुप्रभात! माननीय मुख्य अतिथि, आदरणीय प्रधानाचार्य जी, सम्मानित अभिभावकगण, शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियों, 78वें गणतंत्र दिवस समारोह में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। आज का दिन हमें उस संविधान की याद दिलाता है, जिसने हर भारतीय को बराबरी और सम्मान से जीने का अधिकार दिया। हमारे कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण से होगी। मैं आदरणीय मुख्य अतिथि जी से निवेदन करता/करती हूँ कि वे ध्वजारोहण के लिए पधारें। ध्वजारोहण के बाद हम सब सावधान की मुद्रा में खड़े होकर राष्ट्रगान गाएँगे।
तीन रंगों की आन और हर भारतीय की एक पहचान — आज हम उस दिन का उत्सव मनाने इकट्ठा हुए हैं, जब हमारा संविधान लागू हुआ और भारत एक गणतंत्र बना। आदरणीय प्रधानाचार्य जी, सम्मानित अतिथिगण और प्यारे विद्यार्थियों, इस रंगारंग कार्यक्रम में आप सबका दिल से स्वागत है। सबसे पहले मैं आदरणीय प्रधानाचार्य जी से अनुरोध करता/करती हूँ कि वे मंच पर आकर कार्यक्रम का शुभारंभ करें।
एंकरिंग: कार्यक्रमों के बीच की लाइनें
अब बारी है एक ऐसे वक्ता की, जो अपने शब्दों से देश-प्रेम की तस्वीर बनाएंगे। मैं (कक्षा और नाम) को मंच पर आमंत्रित करता/करती हूँ। तालियों से इनका स्वागत कीजिए।
सुर जब देश के लिए उठते हैं, तो हर दिल एक साथ धड़कता है। अब (कक्षा) के विद्यार्थी एक देशभक्ति गीत प्रस्तुत करेंगे। ज़ोरदार तालियों से उनका हौसला बढ़ाइए।
भारत के हर राज्य का अपना रंग है, अपनी ताल है। इन्हीं रंगों को एक मंच पर लाने आ रहे हैं हमारे नन्हे कलाकार, एक सामूहिक नृत्य के साथ।
संविधान सिर्फ़ पढ़ने की नहीं, समझने की चीज़ है। अगली प्रस्तुति एक छोटा नाटक है, जो दिखाएगा कि हमारे अधिकार और कर्तव्य रोज़ की ज़िंदगी में कैसे काम आते हैं।
एंकरिंग: समापन
साथियों, आज के कार्यक्रम ने हमें दिखाया कि देश-प्रेम सिर्फ़ गीतों और भाषणों में नहीं, हमारे रोज़ के छोटे-छोटे कामों में बसता है। सभी प्रस्तुति देने वाले विद्यार्थियों, उनके मार्गदर्शक शिक्षकों और आप सभी दर्शकों का बहुत-बहुत धन्यवाद। अब धन्यवाद ज्ञापन के लिए मैं आदरणीय (शिक्षक का नाम) जी से निवेदन करता/करती हूँ कि वे मंच पर पधारें।
तिरंगा यूँ ही शान से लहराता रहे, संविधान की रोशनी हर घर तक पहुँचे और हर बच्चा एक ज़िम्मेदार नागरिक बने — इसी कामना के साथ आज का कार्यक्रम यहीं समाप्त होता है। आप सभी को एक बार फिर गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। सब मिलकर बोलिए — जय हिंद! जय भारत!
धन्यवाद ज्ञापन (Vote of Thanks)
आदरणीय मुख्य अतिथि जी, प्रधानाचार्य जी, सम्मानित अभिभावकगण, सहयोगी शिक्षकगण और प्यारे विद्यार्थियों, आज के इस सुंदर समारोह के अंत में मुझे धन्यवाद ज्ञापन का अवसर मिला है, इसके लिए मैं आभारी हूँ।
सबसे पहले मैं हमारे मुख्य अतिथि जी का हृदय से धन्यवाद करता/करती हूँ, जिन्होंने ध्वजारोहण करके और अपने प्रेरक शब्दों से इस दिन को यादगार बना दिया। हमारे प्रधानाचार्य जी का विशेष आभार, जिनके मार्गदर्शन के बिना यह आयोजन संभव नहीं था।
मैं उन सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं का धन्यवाद करता/करती हूँ, जिन्होंने कई दिनों तक बच्चों को तैयारी कराई, और उन सभी विद्यार्थियों का, जिन्होंने अपनी प्रस्तुतियों से हमारा मन जीत लिया। सफ़ाई कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों और सभी सहयोगी स्टाफ़ का भी आभार, जिनकी मेहनत से यह मैदान और मंच इतना सुंदर सजा। अंत में, सर्दी की इस सुबह यहाँ आने वाले सभी अभिभावकों का धन्यवाद — आपकी उपस्थिति ने बच्चों का उत्साह दोगुना कर दिया।
धन्यवाद! जय हिंद! जय भारत!
शिक्षकों और एंकर के लिए टिप्स
- समय पहले से नाप लें: 3 मिनट वाला भाषण करीब 350 शब्द और 5 मिनट वाला करीब 600 शब्द का है। मोबाइल के टाइमर के साथ एक बार पूरा पढ़कर देखें।
- पूरा भाषण पढ़ने की जगह एक छोटे कार्ड पर हर हिस्से की पहली लाइन लिख लें, ताकि नज़र ज़्यादातर बच्चों पर रहे, कागज़ पर नहीं।
- पोडियम के पीछे सीधे खड़े हों, माइक मुँह से थोड़ा नीचे रखें और हर तारीख के बाद आधा पल रुकें।
- “हर कक्षा एक छोटा गणतंत्र है” और “हम, भारत के लोग” वाली लाइनें धीमे और ज़ोर देकर बोलें — बच्चों को यही याद रहती हैं।
- “महोदय/महोदया”, “करता/करती” और कोष्ठक ( ) वाली जगहें पहले से अपने हिसाब से ठीक कर लें, फिर प्रिंट करें।
- एंकर बीच की हर लाइन 20 सेकंड से छोटी रखें, और राष्ट्रगान से पहले सबको सावधान की मुद्रा में खड़े होने को ज़रूर कहें।